“अमेरीकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक (जेई) से इंजनों की पर्याप्त सप्लाई नहीं हो पाने की वजह से स्वदेशी फाइटर जेट की सप्लाई फिर ढीली पड़ सकती है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के चेयरमैन ने यह आशंका जताई है”
नई दिल्ली 18 / 09 / 2025 संतोष सेठ की रिपोर्ट
अमेरीकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक उस गति से इंजन की सप्लाई नहीं कर पा रहा है, जिसका उसने भरोसा दिलाया था। एलएएल ने भारतीय वायु सेना को भरोसा दिलाया था कि मौजूदा वित्त वर्ष में कंपनी उसे 12 स्वदेशी फाइटर जेट तेजस सौंप देगी।
यह भरोसा इस विश्वास के साथ दिया गया था कि तब अमेरीकी कंपनी जेई इंजनों की सप्लाई कतई बाधित नहीं होने देगी। लेकिन अमेरीकी कंपनी इस विश्वास पर अडिग नहीं रह पाई है, लिहाजा एचएएल को तेजस स्वदेशी फाइटर जेट की डिलिवरी की योजना को संशोधित करना पड़ रहा है।
इसका परिणाम यह होगा कि भारतीय वायुसेना को वादे के अनुसार तय समय पर उतने लड़ाकू विमानों की आपूर्ति नहीं हो पाएगी, जितनी की उम्मीद थी। एचएएल के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर डा. डीके सुनील ने एक इंटरव्यू में तेजस की डिलिवरी को लेकर खड़े हुए नए संकट के बारे में जानकारी दी है।
उन्होंने बंगलुरु के अपने स्वदेशी लाइट कांबैट एयरक्राफ्ट (एलसीए) के असेंबली हैंगर में इंजनों (जीई 404 इंजन) के इंतजार की वजह से अपनी तैयारियों पर लगने वाले ब्रेक के बारे में कहा कि अभी हमें अमेरीका से तीन ही इंजन मिले हैं।
हम इन्हें एयरक्राफ्ट में फिट करेंगे और हम डिलिवर करने के लिए तैयार हैं। सारे एयरक्राफ्ट बन चुके हैं। कमी है तो इंजन की। जेई ने बताया था कि वह इंजन आपूर्ति प्रक्रिया को तेजी से पूरी करेगी, लेकिन वादा पूरा नहीं कर पाई।
अमेरीका से इंजन आने में हो रही देरी, पूरा काम बिगाड़ रही है। गौर हो कि एचएएल ने चालू वित्त वर्ष में भारतीय वायुसेना को 12 तेजस लड़ाकू विमान सप्लाई करने का वादा किया था। लेकिन, इंजन पहुंचने में हो रही देरी से इस लक्ष्य को संशोधित करना पड़ सकता है। अब वायुसेना को इस साल 10 तेजस की डिलिवरी ही संभव है।
एयर चीफ मार्शल जता चुके हैं चिंता
ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने सार्वजनिक तौर पर तेजस की डिलिवरी में देरी को लेकर एचएएल की आलोचना की थी और सप्लाई में तेजी लाने का आग्रह किया था।
हालांकि, सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी का यह कहना रहा है कि उसकी ओर से उत्पादन में कोई देरी नहीं है, इंजन के लिए विदेश पर निर्भरता सबसे बड़ी परेशानी है। कुल मिलाकर स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान (एलसीए) तेजस तैयार है, सिर्फ अमेरीकी इंजन ही है, जो इसकी उड़ान में खलल डाल रहा है।
